अशोकनगर: स्वीट सुपारी यू मी के निर्माण एवं विक्रय पर प्रतिबंध लगाये जाने हेतु कमिश्नर, खाद्य सुरक्षा प्रशासन, राजस्थान को लिखा पत्र।
अशोकनगर:आज हम देख रहे हैं कि हमारे शिक्षक और उनके छात्रों का शिक्षा स्तर विशेषकर भाषा शैली को लेकर कैसे दिनों दिन रसातल की और द्रुतगति से जा रहा है। भाषाओं की इस दौर में क्या स्थिति कर दी।यह आज किसी से भी छुपी नहीं है। भाषा की शिक्षा को संक्षिप्तीकरण के जालने ऐसा जकड़ लिया है कि, शब्दों के मानकीकरण इसमें अपनी घुटन और छटपटा हट में दम तोड़ते स्पष्ट महसूस किये जा सकते हैं।
इन सबके पीछे छुपे इतने अधिक कारण हैं कि समय अभाव के चलते इन सब पर विस्तृत चर्चा करना और समझना कोई भी नहीं चाहता है। विशेष कर वह लोग भी जो इस क्षेत्र से संबंधित हैं और जिनका दायित्व भी शिक्षा और भाषा विज्ञान के लिए है।
इस भाषा विज्ञान के मानकीकरण को सीखने और सिखाने के लिए शिक्षक को भी पहले स्वयं इसमें निपुर्ण होना आवश्यक है ,तब ही वह अपने विद्यार्थियों का भी सही शुद्ध रूप से मार्ग प्रशस्त कर सकता है । इसी संदर्भ में मेरे कुछ सुझाव देश के इन भविष्य निर्माताओं के लिए इस तरह से निम्नलिखित हैं!
एक शिक्षक स्वयं भाषाएं (अंग्रेजी और हिंदी)सही ढंग से बोलना और लिखना सीख सकता है, और छात्रों को प्रेरित भी कर सकता है। अगर वह रोज़ाना नियमित अभ्यास, व्यवहार ‑ केंद्रित विधियाँ और सकारात्मक प्रेरक रणनीतियाँ अपनाए।
मुख्य कदम (संक्षेप)
रोज़ाना सुनना और बोलना: रोज़ाना 20–30 मिनट अंग्रेजी और हिंदी में बोलकर और रिकॉर्ड करके सुनें; अपनी रिकॉर्डिंग सुनकर सुधारें।
लक्ष्य‑आधारित अभ्यास: हर सप्ताह एक छोटा लक्ष्य रखें (उदा. 10 नए शब्द, 5 वाक्य, एक छोटा संवाद)।
बहु‑इंद्रिय प्रयोग: दृश्य सहायक, फ़्लैशकार्ड, नाटकीय रोल‑प्ले और शारीरिक क्रियाएँ (TPR) से शब्दावली और वाक्य याद रखें।
व्याकरण को व्यवहार में लगाएँ: नियम पढ़कर रटने की बजाय छोटे संवाद, पत्र, और कक्षा‑गत गतिविधियों में लागू करें।
उच्चारण‑सुधार: शब्दों का सही उच्चारण सुनकर नकल करें, वीडियो/ऑडियो स्रोतों से IPA या उच्चारण वीडियो देखें और ध्वनि‑ अनुवर्तन करें।
शिक्षक कैसे खुद सीखें (प्रैक्टिकल प्लान, 6 हफ्तों का):
सप्ताह 1:
रोज़ाना सुनना: सरल स्नैपशॉट वीडियो/ऑडियो देखें/सुनें और 5–8 वाक्य नोट करें; हिंदी में अर्थ लिखें और वाक्य दोहराएँ।
सप्ताह 2:
बोलने की आदत :दिन में एक छोटा 1–2 मिनट का स्व‑परिचय रिकॉर्ड करें, फिर उसे सुधारें; रोज़ाना 10 नए शब्द जोर से बोलें और वाक्य बनाएं।
सप्ताह 3:
पढ़ना‑लिखना: एक छोटा अनुच्छेद पढ़कर उसका सार हिंदी में लिखें; फिर उसी का अंग्रेज़ी में अनुवाद कर प्रयोगात्मक लेखन करें।
सप्ताह 4:
उच्चारण और स्पेलिंग : फोकस शब्दों के ध्वन्यात्मक पैटर्न सीखें, स्पेलिंग‑ड्रिल करें और कठिन शब्दों की सूची बनाएँ।
सप्ताह 5:
संवाद और रोल‑प्ले:दैनिक जीवन के संवाद तैयार करें और कक्षा में अभिनय करके बोलने का अभ्यास करें।
सप्ताह 6:
कक्षा‑सामग्री बनाना : छोटे पाठ, वर्कशीट और गेम तैयार करें जो आपने सीखी चीज़ों को मजबूत करें।
छात्रों को प्रेरित करने के तरीके (कक्षा में लागू करें):
छोटे‑छोटे चित्र दिखाइये: प्रशंसा, स्टिकर, प्रमाणपत्र और सार्वजनिक सराहना से आत्मविश्वास बढ़ाएँ।
खेल और संगीत: गीत, तुकबंदी, और भाषा‑खेल (Simon Says, memory match, role cards) नियमित रखें।
अर्थपूर्ण संवाद: पाठ्य‑संदर्भ को छात्रों के जीवन से जोड़ें (हॉबी, परिवार, रोज़मर्रा के काम)।
सहकर्मी‑अभ्यास: पेयर‑वर्क और छोटा‑ग्रुप चर्चा लगाएँ ताकि हर छात्र बोलने को प्रेरित हो।
टेक उपयोग: उपयुक्त पाठ, मोबाइल ऐप या ऑडियो क्लिप होम‑वर्क के रूप में दें ताकि घर पर भी प्रैक्टिस हो।
कक्षा‑गत गतिविधियों के उदाहरण (त्वरित):
5‑मिनट “माइक्रो‑स्पीक”: हर क्लास की शुरुआत में एक छात्र 1 मिनट बोलकर अपना अनुभव बताये।
शब्द‑बिंगो: नए शब्दों पर बिंगो कार्ड; पढ़ने पर मार्क करें।
संवाद‑थिएटर: कहानी के छोटे दृश्य दें; छात्र भूमिका निभाएँ।
उपयोगी संसाधन (शुरू करने के लिए)
दिन‑प्रतिदिन के वीडियो‑पाठ्यक्रम और उच्चारण‑वीडियो शुरुआती और क्रमवार सीरीज बनाकर देखें।
कक्षा‑गत रणनीतियों के लेख: TPR, कहानी, गेम्स का उपयोग करने के तरीके पढ़ें।
उच्चारण और स्पेलिंग‑वीडियो/पाठ ध्वनि‑आधारित अभ्यास के लिए छोटे ट्यूटोरियल्स देखें।
एक छोटा प्रेरक उदाहरण:
हर सप्ताह एक “लिटिल‑शो” कराइए: 3-4 छात्रों का छोटा नाटक (दो‑तीन मिनट) तैयारी कक्षा में हुई गतिविधियों से करें; प्रदर्शन से छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे भाषा का वास्तविक उपयोग सीखते हैं।
शिक्षक स्वयं सीखं भाषाएं (अंग्रेजी और हिंदी) सही ढंग से बोलना और लिखना सीख सकता है, और छात्रों को प्रेरित भी कर सकता है। यदि वह रोज़ाना नियमित अभ्यास, व्यवहार‑ केंद्रित विधियाँ और सकारात्मक प्रेरक रणनीतियाँ अपनाए।
मुख्य कदम (संक्षेप)
रोज़ाना सुनना और बोलना: रोज़ाना 20–30 मिनट अंग्रेजी और हिंदी में बोलकर और रिकॉर्ड करके सुनें; अपनी रिकॉर्डिंग सुनकर सुधारें।
लक्ष्य‑आधारित अभ्यास: हर सप्ताह एक छोटा लक्ष्य रखें (उदा. 10 नए शब्द, 5 वाक्य, एक छोटा संवाद)।
बहु‑इंद्रिय प्रयोग: दृश्य सहायक, फ़्लैशकार्ड, नाटकीय रोल‑प्ले और शारीरिक क्रियाएँ (TPR) से शब्दावली और वाक्य याद रखें।
व्याकरण को व्यवहार में लगाएँ: नियम पढ़कर रटने की बजाय छोटे संवाद, पत्र, और कक्षा‑गत गतिविधियों में लागू करें।
उच्चारण‑सुधार: शब्दों का सही उच्चारण सुनकर नकल करें, वीडियो/ऑडियो स्रोतों से IPA या उच्चारण वीडियो देखें और ध्वनि‑अनुवर्तन करें।
शिक्षक कैसे खुद सीखें (प्रैक्टिकल प्लान, 6 सप्ताहों का)
सप्ताह 1:
रोज़ाना सुनना — सरल स्नैपशॉट वीडियो/ऑडियो देखें/सुनें और 5–8 वाक्य नोट करें; हिंदी में अर्थ लिखें और वाक्य दोहराएँ।
सप्ताह 2:
बोलने की आदत: दिन में एक छोटा 1–2 मिनट का स्व‑परिचय रिकॉर्ड करें, फिर उसे सुधारें; रोज़ाना 10 नए शब्द जोर से बोलें और वाक्य बनाएं।
सप्ताह 3:
पढ़ना‑लिखना : एक छोटा अनुच्छेद पढ़कर उसका सार हिंदी में लिखें; फिर उसी का अंग्रेज़ी में अनुवाद कर प्रयोगात्मक लेखन करें।
सप्ताह 4:
उच्चारण और स्पेलिंग — फोकस शब्दों के ध्वन्यात्मक पैटर्न सीखें, स्पेलिंग‑ड्रिल करें और कठिन शब्दों की सूची बनाएँ।
सप्ताह 5:
संवाद और रोल‑प्ले : दैनिक जीवन के संवाद तैयार करें और कक्षा में अभिनय करके बोलने का अभ्यास करें।
सप्ताह 6:
कक्षा‑सामग्री बनाना — छोटे पाठ, वर्कशीट और गेम तैयार करें जो आपने सीखी चीज़ों को मजबूत करें।
छात्रों को प्रेरित करने के तरीके (कक्षा में लागू)
छोटे‑छोटे जीत दिखाइये: प्रशंसा, स्टिकर, प्रमाणपत्र और सार्वजनिक सराहना से आत्मविश्वास बढ़ाएँ।
खेल और संगीत: गीत, तुकबंदी, और भाषा‑खेल (Simon Says, memory match, role cards) नियमित रखें।
अर्थपूर्ण संवाद: पाठ्य‑संदर्भ को छात्रों के जीवन से जोड़ें (हॉबी, परिवार, रोज़मर्रा के काम)।
सहकर्मी‑अभ्यास: पेयर‑वर्क और छोटा‑ग्रुप चर्चा लगाएँ ताकि हर छात्र बोलने को प्रेरित हो।
टेक उपयोग: उपयुक्त पाठ, (मोबाइल ऐप या ऑडियो क्लिप) होम‑वर्क के रूप में दें ताकि घर पर भी प्रैक्टिस हो।
कक्षा‑गत गतिविधियों के उदाहरण (त्वरित)
5‑मिनट “माइक्रो‑स्पीक”: हर क्लास की शुरुआत में एक छात्र 1 मिनट बोलकर अपना अनुभव बताये।
शब्द‑बिंगो: नए शब्दों पर बिंगो कार्ड; पढ़ने पर मार्क करें।
संवाद‑थिएटर: कहानी के छोटे दृश्य दें; छात्र भूमिका निभाएँ।
उपयोगी संसाधन (शुरू करने के लिए)
दिन‑प्रतिदिन के वीडियो‑पाठ्यक्रम और उच्चारण‑वीडियो से शुरुआती और क्रमवार सीरीज जहां से भी आपको उपलब्ध हो सके उसे देखें ।
कक्षा‑गत रणनीतियों के लेख: TPR, कहानी, गेम्स का उपयोग करने के तरीके अपनाएं।
उच्चारण और स्पेलिंग‑पाठ जो ध्वनि ‑आधारित हों ऐसे अभ्यास के लिए छोटे ट्यूटोरियल्स के माध्यम से अभ्यास कराना उचित रहेगा।
एक छोटा प्रेरक उदाहरण
हर सप्ताह एक “लिटिल‑शो” कराइए: 3–4 छात्रों का छोटा नाटक (दो‑तीन मिनट) — तैयारी कक्षा में हुई गतिविधियों से करें; प्रदर्शन से छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे भाषा का वास्तविक उपयोग सीखते हैं। बच्चों को आसानी से अंग्रेज़ी सिखाने के लिए 5 सबसे असरदार और सरल तरीके इस तरह निम्न लिखित हैं।
1. टोटल फिजिकल रिस्पांस (TPR - शरीर की हलचल से सीखना):इस तरीके में बच्चों को शब्द सिखाने के लिए हाव-भाव और शरीर की हरकतों (एक्शन) का इस्तेमाल किया जाता है।
उदाहरण: यदि आप बच्चों को "Jump" (कूदना) शब्द सिखा रहे हैं, तो शिक्षक खुद कूदकर दिखाएंगे और बच्चे भी उनकी नकल करेंगे। इससे बच्चे खेल-खेल में शब्दों को हमेशा के लिए याद रख पाते हैं।
2. विजुअल ऐड्स (देखकर समझना): छोटे बच्चे तस्वीरों को देखकर जल्दी सीखते हैं। इसलिए पढ़ाते समय फ्लैशकार्ड, रंगीन तस्वीरें, पोस्टर और असली चीजों (जैसे फल, खिलौने) का इस्तेमाल करना चाहिए।
लाभ: इससे बच्चे शब्द और वस्तु के बीच आसानी से संबंध जोड़ लेते हैं और बात को गहराई से समझते हैं।
3. दोहराव और अभ्यास (Repetition & Drill): बच्चे किसी भी चीज़ को बार-बार सुनकर और बोलकर सीखते हैं।
तरीका: कविताएं (Rhymes), गाने और छोटे-छोटे भाषा के खेलों के माध्यम से एक ही शब्द या वाक्य को बार-बार दोहराया जाना चाहिए। इससे बच्चों का संकोच दूर होता है और अंग्रेज़ी बोलने में उनका आत्मविश्वास बढ़ता है।
4. कहानी सुनाना और ज़ोर से पढ़ना (Storytelling): बच्चों को उनकी उम्र के हिसाब से रंगीन चित्रों वाली कहानियों की किताबें ज़ोर-ज़ोर से पढ़कर सुनानी चाहिए।
लाभ: कहानी सुनाते समय बच्चों से बीच-बीच में सवाल पूछने चाहिए और बातचीत करनी चाहिए। इससे बच्चों को नए शब्द और वाक्य बनाने का सही तरीका पता चलता है।
मुख्य निष्कर्ष (Summary):
छोटे बच्चों को रटाने के बजाय सक्रिय भागीदारी (Active Participation), गाने, खेल, रंगीन चित्रों और शारीरिक गतिविधियों (एक्शन) के जरिए अंग्रेज़ी का माहौल देना चाहिए। इससे वे बिना किसी डर के, मजे-मजे में सुनना, बोलना और पढ़ना सीख जाते हैं।
बड़ी कक्षाओं (जैसे कक्षा 6 से 8 या उससे ऊपर) के छात्रों को अंग्रेज़ी सिखाने का तरीका छोटे बच्चों से बिल्कुल अलग होता है। इस उम्र में छात्र चीजों को समझ सकते हैं, तर्क कर सकते हैं और खुद से सोच सकते हैं।
बड़ी कक्षाओं के छात्रों के लिए अंग्रेज़ी सीखने के 5 सबसे सरल और प्रभावी तरीके नीचे दिए गए हैं:
1. संदर्भ के अनुसार शब्दावली सीखना (Contextual Vocabulary): शब्दों की लंबी लिस्ट रटने के बजाय, छात्रों को नए शब्द किसी कहानी, लेख या वाक्य के संदर्भ (Context) में सीखने चाहिए।
तरीका: जब छात्र कोई पाठ पढ़ रहे हों और कोई नया शब्द आए, तो वे पूरे वाक्य को पढ़कर उसके अर्थ का अंदाजा लगाने की कोशिश करें। इसके बाद उस शब्द से खुद 2 नए वाक्य बनाएं। इससे शब्द हमेशा के लिए याद हो जाता है।
2. 'टॉक शो' और वाद-विवाद (Group Discussions & Debates): बड़ी कक्षा के छात्रों में झिझक या डर सबसे बड़ी रुकावट होती है। इसे दूर करने के लिए कक्षा में बातचीत का माहौल बनाना ज़रूरी है।
तरीका: छात्रों को छोटे समूहों (Groups) में बांट दें और उन्हें किसी भी ट्रेंडी विषय (जैसे- सोशल मीडिया, तकनीक, या खेल) पर बातचीत या वाद-विवाद करने को कहें। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे अंग्रेज़ी में सोचना शुरू करते हैं।
3. व्यावहारिक व्याकरण (Functional Grammar): व्याकरण (Grammar) के कठिन नियमों को रटने के बजाय, यह सीखें कि उनका असल ज़िंदगी में इस्तेमाल कैसे होता है।
तरीका: केवल 'Tense' के नियम याद करने के बजाय, छात्रों को कहें कि वे "अपने बीते हुए कल (Past)" या "अपने सपनों के भविष्य (Future)" के बारे में एक पैराग्राफ लिखें। नियमों को सीधे लिखने या बोलने में लागू करने से व्याकरण सहज हो जाता है।
4. सहकर्मी समीक्षा (Peer Review & Collaborative Learning):छात्र अपने दोस्तों के साथ मिलकर बहुत जल्दी सीखते हैं क्योंकि वहां वे गलती करने से डरते नहीं हैं।
तरीका: छात्रों को जोड़े (Pairs) में काम करने दें। एक छात्र अंग्रेज़ी में कुछ लिखे या बोले, और दूसरा दोस्त उसकी कमियों को सुधारे। इससे दोनों की भाषा में सुधार होता है और टीम वर्क की भावना भी बढ़ती है।
5. डिजिटल टूल्स और मीडिया का उपयोग (Digital Tools & Media): आज के छात्र तकनीक से घिरे हैं, इसलिए इसका सही इस्तेमाल भाषा सीखने में किया जा सकता है।
तरीका: छात्रों को अंग्रेज़ी पॉडकास्ट (Podcasts) सुनने, सबटाइटल्स के साथ अंग्रेज़ी फिल्में/डॉक्यूमेंट्री देखने और अंग्रेज़ी समाचार पत्र पढ़ने के लिए प्रेरित करें। इसके अलावा, भाषा सीखने वाले ऐप्स (जैसे Duolingo या अन्य) का उपयोग भी काफी मददगार होता है।
संक्षेप में (In Short):
बड़ी कक्षाओं के लिए अंग्रेज़ी सिखाने का मूल मंत्र है:
"रटना छोड़ें, उपयोग शुरू करें"। छात्र जितना अधिक बोलेंगे, लिखेंगे और आपस में चर्चा करेंगे, उनकी भाषा उतनी ही प्राकृतिक और मजबूत होती जाएगी।
यदि सभी शिक्षक गण एवं उनके विद्यार्थी उक्त बतायें तरीकों को ईमानदारी से अपनाते हैं, तो फिर निश्चित ही भाषा विज्ञान और उनके मानकीकरण को सफलता पूर्वक अपने स्थान पर स्थापित करने में अहम भूमिका का निर्वहन कर सकेंगे, शुभकामनाएं!
डॉ.डी.एस.संधु
राष्ट्रीय संचालक
भारतीय नौजवान सांस्कृतिक संघ (इयूका) भारत
सट्टा किंग आजाद पर हुई एफआई आर
अशोकनगर : राजीव कुमार मिश्रा जिला पुलिस अधीक्षक के निर्देशों को मूर्तरूप देने के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गजेन्द्र सिंह कंवर एवं एसडीओपी विवेक शर्मा के मार्गदर्शन में कोतवाली प्रभारी (पीआई)रवि प्रताप सिंह चौहान ने विशेष टीम गठित करते हुए शहर में अवैधानिक तरीके से ऑनलाइन सट्टे के विरुद्ध धर पकड़ की गई है। तथा सट्टा किंग आजाद खान मंसूरी पुत्र अलीम खां उर्फ पप्पू टेलर के विरुद्ध मिले साक्ष्यों के आधार पर वैधानिक कार्यवाही करने हेतु एफ आई आर कायम की गई है । इस संबंध में एसपी राजीव कुमार मिश्रा ने प्रेस कांफ्रेंस करते हुए विस्तृत जानकारी दी।
मेलियोइडोसिस का बढ़ता खतरनाक संक्रमण -डॉ.डी.एस.संधु
मेलियोइडोसिस का बढ़ता खतरनाक संक्रमण ! -डॉ.डी.एस.संधु
अशोकनगर: आज थोड़े अंतराल पश्चात अपने साथी राजेश दुबे के संस्थान पर जाना हुआ जहां वो तो नहीं मिले अलबत्ता वहां काम कर रहे लोगों से जानकारी मिली कि उनके बहनोई साहब की तबियत खराब हो ने के कारण वो बाहर गये हैं । फोन से संपर्क होने पर उन्होंने जो स्वास्थ्य समस्या बताई वो निश्चित ही चिंता जनक कहीं जा सकती है। क्योंकि इस समय मध्यप्रदेश में मेलियोइडोसिस नामक खतरनाक संक्रमण हाल ही में सक्रिय हुआ है, जो एक “वायरस” नहीं बल्कि एक गंभीर बैक्टीरिया-जनित बीमारी है।
साहित्य कला संस्कृति की अनमोल धरोहर
अशोकनगर: भारतीय हिन्दी साहित्य जगत में आजकल जिन साहित्य सृजन धर्मियों की चर्चा आये दिन होती रहती है, उनमें एक चर्चित नाम है डॉ. दविंदर सिंह संधु जी हां हमारे अपने बीच के ही हैं डॉ.दविंदर सिंह संधु अर्थात जिन्हें डॉ.डी.एस.संधु के नाम से सब दूर जाना पहचाना जाता है। डॉ.संधु बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं, जिन्होंने अपनी कलम और कला के दम पर अपनी प्रतिभा के झंडे देश -विदेशों में लहराते हुए अपने शहर का नाम विभिन्न विधाओं में सृजन करते हुए रोशन किया है। फिर चाहे समकालीन हिन्दी कविताएं, कहानियां, नाटक, जनगीत, पेंटिंग्स,गायन, नृत्य, अभिनय तथा निर्देशन हो चाहे चिकित्सा का क्षेत्र से लगाकर सामाजिक विचारक, रचनात्मक पत्रकारिता एवं संपादन और समीक्षा का हो सभी क्षेत्रों में अविलंब रूप से सक्रिय भूमिका का निर्वहन करते आ रहे हैं।
इयूका का उड़ीसा में शताब्दी वर्ष एवं सम्मान समारोह आयोजित
इयूका का उड़ीसा में शताब्दी वर्ष एवं सम्मान समारोह आयोजित*
बरपाली (उड़ीसा): भारतीय नौजवान सांस्कृतिक संघ ( इयूका) की स्थापना के 17दिसंबर 2024 मंगलवार को शताब्दी वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मारवाड़ी धर्मशाला बरपाली जिला बरगढ़ उड़ीसा में बहुत ही हर्षोल्लास के बीच विभिन्न सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कार्यक्रमों के साथ देश के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय व्यक्तियों को उनके विशेष योगदानों के संबंध में अलग-अलग 17 राष्ट्र स्तरीय सम्मान इयूका ने प्रदान किये।
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इयूका के स्थापना को हुई शताब्दी
भगतसिंह एवं साथियों द्वारा
भारतीय नौजवान सांस्कृतिक संघ (इयूका)
की स्थापना
बच्चे मन के सच्चे सारे जग की आंखों के तारे -डॉ.डी.एस.संधु
अशोकनगर: देश के पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिन के अवसर पर भादोन स्थित सेवालय सोशल वर्क सेंटर में मदर सुश्री एनसिलीन की अध्यक्षता तथा डॉक्टर डी.एस. संधु सीएमडी (ग्लोरी न्यूज़) के मुख्य आतिथ्य में बहुत ही हर्ष उल्लास के साथ मनाया गया।
इस अवसर पर सेवालय परिसर में बैलून रेस, चियर रेस, क्विज़ कॉम्पिटिशन, एवं निबंध लेखन आदि प्रतियोगिताएं करवाई गईं।
चिकनगुनिया का संक्रमण सौ से भी अधिक देशों को कर रहा प्रभावित –डॉ॰डी॰ एस॰ संधु
जयपुर में डॉ.डी.एस.संधु हुए डायमंड डिग्निटी अवार्ड -2024 से सम्मानित ।
अशोकनगर: जयपुर में सुरेश ज्ञान विहार विश्व विद्यालय, जगतपुरा के विशाल एवं वातानुकूलित सभागार में भव्या फाउंडेशन द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय मैत्री सम्मेलन एवं इंडियन डायमंड डिग्निटी अवार्ड -2024 रविवार को संप
राष्ट्रमंडल खेल और भारत की स्थिति
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